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Sunday, June 26, 2022

गलत क्या है ?

प्रिय मित्रों गलत को गलत ना कहना भी गलत बात है । इससे समाज में एक नकारात्मक संदेश जाता है जिससे अपराध की संख्या में भी इजाफा होता है । क्योंकि जब एक इंसान दूसरे के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ नहीं बोलेगा तो निश्चित है कि वह भी किसी अन्य व्यक्ति के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ नहीं बोलेगा ।
हमलोगों को समझना होगा कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है और उसका समाज के लिए कुछ न कुछ योगदान है इसलिए किसी के भी साथ अन्याय होना समाज के लिए घातक है।

Wednesday, June 22, 2022

क्या आपने कभी सोचा ?

क्या आप भी अपने जीवन में हुई घटनाओं के बारे में सोचते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं कि क्यों हुआ कैसे हुआ ?यदि हाँ तो आप अच्छा सोचते हैं और आप अपने जीवन के प्रति सजग हैं सचेत हैं।
दोस्तो हमारे जीवन में केवल एकाध ऐसी घटना होती है जो अकस्मात होती है और वही हमारे जीवन की दशा को जीवन भर के लिए बदल सकती और ये घटना अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी ये आपकी किस्मत पर निर्भर करता है कि आपकी किस्मत कैसी है ?
बाकी और जो भी घटनाएं होती हैं वो एकदम से नहीं होती हैं उनके घटित होने में हमारा कोई ना कोई हाथ होता है या ये कहिये उनके पीछे हमारी ही मनोदशा या कार्यशैली होती है जिसे हम पूर्व में कर चुके होते हैं । इसलिए हमेशा दूसरों के साथ वैसा करिये जिससे बाद में आपको पछताना ना पड़े।

शर्माना छोड़िये, आगे बढिये👍

किसी भी व्यक्ति को कुछेक मामलों को छोड़कर शर्माना नहीं चाहिए विशेषकर एक विद्यार्थी को अपने अध्ययनकाल में उसको चाहिए कि वो बेझिझक, बिंदास  और निडर होकर पढ़ाई करे ।उसको पढ़ाई से संबंधित किसी भी समस्या का समाधान उसके शिक्षकों द्वारा होता है इसलिए उसे उनसे किसी भी प्रकार का सवाल पूछने में शर्माना नहीं चाहिए ।

एक विद्यार्थी को निडर होना चाहिए उसेे समाज के उन 4 लोगों का भय नहीं होना चाहिए जो उसको उसकी इच्छा के अनुरूप कार्य करने पर ताना देते हैं या उसके असफल होने का मौका तलाश करते हैं।

Saturday, June 18, 2022

कभी भी निराश नहीं होना चाहिए

दोस्तों हमारी जिंदगी में कुछ परेशानियाँ ऐसी भी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी सुलझा नहीं सकते  इसलिए उन्हें भूलकर आगे बढ़ना चाहिए केवल उन्हीं को सुलझाने के चक्कर में अपना समय नष्ट नहीं करके आगे की सोचकर चलना बेहतर होता है।

Wednesday, September 5, 2018

शिक्षक दिवस क्या है भारत में क्यों मनाते हैं।

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का आज काफी समय बाद उपस्थित हुआ हूँ ।आपके लिये यहाँ पर हमारा आज का विषय है शिक्षक दिवस। मैं आप सभी को बताना चाहूंगा कि इस दिन को भारत में इसलिये मनाया जाता है कि भारत के जो सबसे पहले उपराष्ट्रपति थे जिनका कार्यकाल (1952-1959)लगातार दो बार था।
 श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन उनका जन्म 5सितम्बर 1888 को हुआ था जोकि एक अध्यापक,हिन्दू विचारक तथा एक महान दार्शनिक भी थे। उनके इन्हीं गुणों को ध्यान में रखते हुए सन 1954 में भारत सरकार ने उनको भारत रत्न से सम्मानित किया और उनके निधन के पश्चात उनके सम्मान में उनके  जन्मदिवस को भारत में शिक्षकों का दिवस घोषित कर दिया गया।
दोस्तो ये बातें तो थीं शिक्षक दिवस से जुड़ी हुई। लेकिन अब बात करते हैं हम अपने जीवन के बारे में हमारे लिए अध्यापकों का क्या महत्व है तो अब आप जरा सोचिये कि अगर हमें पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं होते तो क्या हम वो सब कर पाते जो हम पढ़ लिखकर पाना चाहते हैं ।
अब उन लोगों के बारे में भी सोचिये जो एक विश्वविख्यात डॉक्टर,इंजीनियर,अच्छे प्रवक्ता तथा एक अच्छे इंसान बन जाते हैं आखिर........ कैसे वो केवल इसलिए की उनकी लगन और मेहनत के साथ-साथ उनको अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलता रहा। मेरा मानना है कि हर कामयाब शख्स के पीछे एक अध्यापक की बड़ी भूमिका होती है।
दो शब्द सभी गुरुओं को
रोशनी बनकर जो आये हमारी जिंदगी में ऐसे             गुरुओं को में प्रणाम करता हूँ,! जमीन से,
आसमान तक पहुंचाने का रखते हैं जो हुनर उनको शीश झुकाकर नमन करता हूँ।
इसलिए 5सितंबर को केवल एक दिन के रूप में सोशल साइट्स पे ना मनाकर अपने गुरुओं से आशीर्वाद लें और उनका दिल से धन्यवाद अदा करें।
इसके साथ ही मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि,
                 मानव होना भाग्य है और शिक्षक होना सौभाग्य

Thursday, July 13, 2017

क्या करूँ कैसे करूँ

दोस्तों जैसा कि आप लोग जानते हो इस दुनिया मैं कुछ भी पाने के लिए कुछ करना ही पड़ता है। बगैर कुछ किये तो हम लोग कुछ भी हासिल नहीं कर सकते चलो मैं आपको उदाहरण देता हूँ क्या हमने कभी सोचा कि "पापा" हमारी स्कूल/कॉलेज फीस कहाँ से लाते हैं या हमारी अन्य जरूरतों को कैसे पूरा करते हैं कभी सोचा नहीं ना क्यों क्योंकि हमलोग सोचते हैं कि यह तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है जब हमको पैदा किया गया है तो   जरूरतों को तो पूरा करना उनकी ज़िम्मेदारी है हाँ सही है लेकिन कभी आपने कभी यह महसूस किया कि वो ये सब क्यों करते हैं क्या-क्या त्याग देते हैं हमारी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिये सिर्फ इसलिए नहीं कि हम उनके बच्चे हैं बल्कि इसलिये भी की वो चाहते हैं कि हमलोग पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े हों और  एक अच्छे इंसान बनें।
इसलिये माँ-बाप के त्याग के बारे में सोचना जरूर क्योंकि इस बात पर विचार करोगे के तो जिंदगी में उनके सपनों को पंख लगा पाओगे।यदि आप लोगों कि समस्या यह है कि कैसे करूँ कुछ तो उन लोगों के बारे में भी सोचना जो बगैर हाथ या पांव के भी इस दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
मेरी बात पढ़ने के लिए धन्यवाद
      आप सभी को सुभरात्री

Saturday, May 20, 2017

परेशानियाँ

हमें अपने जीवन में न जाने कितनी  मुसीबतों का सामना करना पड़े और हो सकता है कि  हम लोगों में से बहुत से इन मुसीबतों का सामना कर भी चुके हों मेरा कहने का आशय यह है कि जब मुसीबतों का सामना  करना ही है तो क्यों न उनका सामना हँसते-मुस्कुराते हुए किया जाये ! दोस्तों ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है इस संसार में जिसे कोई परेशानी न हो या उसने मुसीबतों का सामना न किया हो अपने जीवन में! केवल पैसे का  पास में ना होना ही कोई परेशानी का कारण  नहीं होती है हमारे जीवन में क्योंकि परेशानियां उन लोगों को भी बहुत हैं जिनके पास पैसा है ! पैसे से तो केवल मानव अपने जीवन में भौतिक सुख सुविधाओं का लाभ ले सकता है लेकिन जो चीज़ें पैसों से नहीं खरीदी जा सकती उसका महत्व कहीं अधिक है!